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About the Book: Ashtakavarga: अष्टकवर्ग भावों एवं ग्रहों के बलाबल के आंकलन करने की एक अद्वितीय पद्धति है और सटीक फलित करने में सही मार्गदर्शन का काम करती है। इसका एक उदाहरण दें तो जन्मपत्रिका में सुस्थित सूर्य जातक को प्रमत्त उंचाई की ओर ले जाएगा। ऐसा जातक जन्म से ही नेतृत्व करने की क्षमता वाला होगा और जीवन में बड़ी आसानी से उसे सफलतायें प्राप्त होगीं। चूंकि नैसर्गिक राशिचक्र में सूर्य पंचम भाव का कारक ग्रह है, पंचम भाव अर्थात पूर्व पुण्यों, सफलता एवं बौधिक क्षमता का भाव, अतः जन्मपत्रिका में बली सूर्य के बिना जीवन में उच्च स्तर एवं सफलताओं को प्राप्त करना संभव नहीं है। इसी प्रकार बली चन्द्रमा जातक को आम लोगों की भलाई में रुचि रखने वाला श्रेष्ठ मानववादी व्यक्ति बनाएगा और अपार मानसिक शान्ति प्रदान करेगा। पीड़ित एवं निर्बली चन्द्रमा वाले जातक के पास अच्छी सोच-विचार की क्षमता नहीं होती है और वह विषाद ग्रस्त एवं जड़मति होता है।
| Composition | |
| Product Code | DCI-00809 |
| Edition | 2026 |
| Condition | New |
| Language | Hindi |
| Binding | Paperback |
| Pages | 193 |
| ISBN 13 | 978-8170822516 |
| Dimension | 22 x 14.5 x 1.5 CM |
| Weight | 250 GR |
| Country of Origin | India |
- Stock: In Stock
- Author: M.S. Mehta & Rajesh C. Dadwal
- SKU: DCI-00809
- ISBN: 978-817082251

